मौसम बदलते ही हर बार आपको एलर्जी क्यों हो जाती है?

seasonal-allergies-symptoms-treatment-and-precautions : मौसम बदलने से तबीयत खराब होती है ये सोचकर हमें इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। जब भी मौसम बदलता है, जैसे की गर्मियों से सर्दियों की ओर या सर्दियों से गर्मियों की तरफ, तो एक बात साफ है – एलर्जी हमारे लिए एक बड़ी परेशानी बन जाती है। ये बहुत ही आम समस्या है, इसलिए लोग यह सोचते हैं कि जब मौसम बदलेगा, ‘तबीयत खराब होगी ही।’

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अगर आपको बार-बार सर्दी, जुकाम, खुजली या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो आप शायद किसी एलर्जी का शिकार हो सकते हैं। एलर्जी के मामलों में कई बार आम दवाइयाँ कारगर नहीं होतीं या फिर हम उन्हें बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, जो कि खतरनाक हो सकता है। आज हम डॉक्टर से जानेंगे कि मौसम बदलने से एलर्जी क्यों होती है और इससे बचाव के लिए क्या कर सकते हैं।

इस मुद्दे पर हमने डॉक्टर राजीव गुप्ता से बातचीत की है। डॉ गुप्ता नई दिल्ली के सीके बिरला हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के निदेशक हैं।

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तरह-तरह की एलर्जी seasonal-allergies-symptoms-treatment-and-precautions

मसौम में जब भी बदलाव होता है, सांस से जुड़ी एलर्जी के मामले अस्पतालों में बढ़ जाते हैं. जैसे –

-1. एलर्जिक राइनाइटिस (Allergic Rhinitis)

-2. एलर्जिक ब्रॉन्काइटिस (Allergic Bronchitis)

-3. एलर्जिक फैरिन्जाइटिस (Allergic Pharyngitis)

-4. एलर्जिक साइनसाइटिस (Allergic Sinusitis) 

-5. एलर्जिक ब्रॉन्काइल अस्थमा (Allergic Bronchial Asthma)

मौसम के बदलने से वातावरण में कई बदलाव आते हैं। वर्तमान में बहुत अधिक मात्रा में पोलन हवा में होते हैं। पोलन का अर्थ होता है पराग-कण। जो पौधों से निकलते हैं, उनके फूलों में वह पाउडर जैसा दिखने वाले होते हैं, वही पोलन या पराग-कण कहलाते हैं। ये पराग-कण पौधों के सेक्शुअल रीप्रोडक्शन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, कुछ पोलन मधुमक्खियों और तितलियों के ज़रिये एक फूल से दूसरे फूल तक पहुंचते हैं। और कुछ पोलन इतने हल्के होते हैं कि वे हवा में बहने लगते हैं। इन पराग-कणों की हवा में होने से कई लोगों को एलर्जी होती है।

ठंड के मौसम में, धरती के नजदीक हवा घनी और भारी होती है, जबकि ऊपरी हवा गर्म और हल्की होती है। इस वजह से पार्टिकुलेट मैटर नीचे की ठंडी हवा में आकर बस जाते हैं। पार्टिकुलेट मैटर का अर्थ है वातावरण में मौजूद प्रदूषण के वो कण, जिनका आकार 2.5 माइक्रोन से 10 माइक्रोन के बीच होता है। पार्टिकुलेट मैटर के साथ, पोलन भी हवा में मौजूद होते हैं जो एलर्जी के कारण बनते हैं। इस वजह से मौसम के बदलाव में एलर्जी के मामले ज्यादा होते हैं।

विभिन्न प्रकार की एलर्जी के विभिन्न लक्षण होते हैं। यहाँ कुछ उदाहरण हैं –

  • एलर्जिक राइनाइटिस में व्यक्ति को बार-बार छींक आती है, नाक से पानी बहता है, साथ ही सिर दर्द, आंखों में जलन, कान दर्द और हल्का बुखार भी हो सकता है।
  • गले की एलर्जी की वजह से गले में जलन हो सकती है। seasonal-allergies-symptoms-treatment-and-precautions
  • अगर किसी को एलर्जिक ब्रोंकाइल अस्थमा है तो सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। जल्दी थकान, बोलने में परेशानी, ठीक से ना सो पाना, छोटे बच्चों में सांस लेने की आवाज आना, छाती में दर्द और खाने में कठिनाई के लक्षण भी दिख सकते हैं।

किन बातों का ध्यान रखें?

एलर्जी के मामले में ध्यान रखना जरूरी है। जो भी चीज आपको एलर्जी हो, उससे दूरी बनाए रखें। जब मौसम में ज्यादा फूल खिलते हैं, तो बाहर जाने पर N-95 मास्क पहनना चाहिए। प्रदूषण के समय बाहर न जाएं। अचानक ठंड बढ़ने पर ठंड से बचाव भी जरूरी है। इसके अलावा, मुंह धोना भी जरूरी है। डॉक्टर की सलाह पर कुछ एंटी-एलर्जिक दवाएं ली जा सकती हैं। जैसे कि नाक में डालने वाली दवा या टैबलेट। एलर्जी से पीड़ित लोगों को लंबे समय तक जुकाम या खांसी रह सकती है, जिसका इलाज दवाइयों से होता है।

इलाज

एलर्जी के लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। मरीज का इलाज नेबुलाइजेशन थेरेपी द्वारा किया जाता है। अस्थमा के मरीजों का इलाज कुछ टैबलेट और स्टेरॉइड से भी होता है। एलर्जी का इलाज आसान है लेकिन अगर इसे ध्यान में नहीं रखा गया तो यह जानलेवा भी हो सकता है। अच्छा और पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए, धुएं से बचना चाहिए, और धूम्रपान नहीं करना चाहिए। इन सभी बातों का पालन करके आप खुद को एलर्जी से बचा सकते हैं और दूसरों को भी इसके बारे में जागरूक कर सकते हैं।

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